ग्वालियर की जीवाजी यूनिवर्सिटी (Jiwaji University), जो अपने विशाल और हरे-भरे परिसर के लिए जानी जाती है, वर्तमान में एक गंभीर पर्यावरणीय विवाद के केंद्र में है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा परिसर में चल रहे नए निर्माण कार्यों के नाम पर सैकड़ों पुराने और हरे-भरे पेड़ों की कटाई ने पर्यावरण प्रेमियों, छात्रों और स्थानीय प्रशासन के बीच तनाव पैदा कर दिया है
विवाद की शुरुआत: निर्माण बनाम पर्यावरण
विवाद तब शुरू हुआ जब विश्वविद्यालय परिसर के भीतर कुछ नई इमारतों (संभवतः हॉस्टल या शैक्षणिक ब्लॉक) के लिए जगह साफ करने का काम शुरू किया गया। इसके लिए वन विभाग और नगर निगम की पूर्व अनुमति के बिना ही दर्जनों की संख्या में नीम, पीपल और बरगद जैसे बड़े पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी गई।
स्थानीय निवासियों और छात्रों ने जब परिसर से कटी हुई लकड़ियों से लदे ट्रैक्टरों को बाहर जाते देखा, तो उन्होंने इसका विरोध किया। देखते ही देखते यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और पर्यावरण संगठनों ने विश्वविद्यालय के इस कदम को “पारिस्थितिक हत्या” (Ecological Murder) करार दिया।
नगर निगम की छापेमारी और जब्ती
विवाद बढ़ने पर ग्वालियर नगर निगम के उद्यान विभाग की टीम ने विश्वविद्यालय परिसर का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान टीम ने पाया कि:
- अवैध कटाई: कई पेड़ ऐसे थे जिन्हें बिना किसी कागजी अनुमति के काट दिया गया था।
- लकड़ी की बरामदगी: मौके पर भारी मात्रा में गीली लकड़ी (हरे पेड़ों की) बरामद की गई, जिसे बिना किसी अनुमति के खुर्द-बुर्द करने की तैयारी थी।
- पंचनामा: नगर निगम की टीम ने मौके पर ही पंचनामा बनाया और कटी हुई लकड़ियों को अपने कब्जे में ले लिया।
विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क
विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि वे केवल उन्हीं पेड़ों को हटा रहे थे जो निर्माणाधीन बिल्डिंग के नक्शे में बाधा बन रहे थे या जो पुराने होकर गिरने की स्थिति में थे। प्रशासन ने यह भी दावा किया कि काटे गए पेड़ों के बदले वे परिसर के दूसरे हिस्सों में ‘प्लांटेशन’ (वृक्षारोपण) करेंगे। हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों का तर्क है कि दशकों पुराने पेड़ों की जगह नए पौधे लगाना उनकी कमी को तुरंत पूरा नहीं कर सकता।
वन विभाग और कानून की सख्त कार्रवाई
मध्य प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम के तहत, किसी भी सरकारी या निजी परिसर में हरे पेड़ काटने के लिए सक्षम अधिकारी (SDO या नगर निगम) से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है।
- नोटिस जारी: नगर निगम ने जीवाजी यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
- जुर्माना: नियमों के उल्लंघन के लिए विश्वविद्यालय पर भारी जुर्माना लगाने की तैयारी की जा रही है।
- जांच समिति: संभागायुक्त ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं, जो यह देखेगी कि क्या पेड़ों की कटाई के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता अपनाया जा सकता था।
छात्रों और नागरिकों का विरोध
जीवाजी यूनिवर्सिटी के छात्रों ने कुलपति कार्यालय के बाहर मौन प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना है कि ग्वालियर पहले ही भीषण गर्मी और प्रदूषण की चपेट में रहता है, ऐसे में यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान द्वारा हरियाली को नष्ट करना शर्मनाक है। उन्होंने मांग की है कि निर्माण का नक्शा बदलकर शेष पेड़ों को बचाया जाए।
निष्कर्ष
यह विवाद विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की कमी को दर्शाता है। जीवाजी यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से यह अपेक्षा की जाती है कि वह समाज के सामने पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण पेश करे, न कि नियमों को ताक पर रखकर हरियाली का विनाश करे। इस मामले में आगामी जांच यह तय करेगी कि क्या प्रशासन केवल जुर्माना भरकर बच जाएगा या दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी।







