ग्वालियर के प्रतिष्ठित गजरा राजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) में पैरामेडिकल छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब एक गंभीर मोड़ ले चुका है। पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों ने आज 15 जनवरी 2026 की सुबह कॉलेज के मुख्य गेट पर एक ‘प्रतीकात्मक फांसी’ का फंदा लटकाकर विरोध जताया। इस घटना ने न केवल कॉलेज प्रशासन बल्कि जिला प्रशासन और शासन के गलियारों में भी हड़कंप मचा दिया है।
विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण: ‘शून्य वर्ष’ (Zero Year) का डर
पैरामेडिकल छात्रों के इस उग्र प्रदर्शन के पीछे सबसे बड़ी वजह उनकी परीक्षाओं में होने वाली अत्यधिक देरी है। छात्रों का आरोप है कि उनका सत्र (Session) कई साल पिछड़ चुका है।
- परीक्षाओं का अभाव: कई छात्र ऐसे हैं जिनका नामांकन 3-4 साल पहले हुआ था, लेकिन अभी तक उनकी प्रथम या द्वितीय वर्ष की परीक्षाएं भी संपन्न नहीं हुई हैं।
- भविष्य पर संकट: परीक्षाओं में देरी के कारण छात्रों को अपना भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। उन्हें डर है कि उनके शैक्षणिक सत्र को ‘जीरो ईयर’ घोषित किया जा सकता है, जिससे उनकी मेहनत और पैसा दोनों बर्बाद हो जाएंगे।
‘फांसी का फंदा’ और अनोखा विरोध
आज सुबह जब कॉलेज के डॉक्टर और स्टाफ ड्यूटी पर पहुँचे, तो उन्होंने मुख्य गेट पर रस्सी से बना एक फंदा लटका देखा। इसके पास ही छात्र नारेबाजी कर रहे थे। छात्रों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी उन्हें “मानसिक आत्महत्या” की ओर धकेल रही है।
- छात्रों ने पोस्टर और बैनर पकड़े हुए थे जिन पर लिखा था— “परीक्षा नहीं तो भविष्य नहीं” और “डिग्री दें या फांसी”।
- पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत मौके पर पहुँचकर फंदे को हटाया, लेकिन छात्र गेट पर ही धरने पर बैठ गए और नारेबाजी जारी रखी।
प्रमुख मांगें और शिकायतें
प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी मांगों की एक सूची (Memorandum) कॉलेज डीन और संभागायुक्त के नाम सौंपी है:
- परीक्षाओं का समयबद्ध आयोजन: रुके हुए सभी सत्रों की परीक्षाएं तत्काल आयोजित की जाएं और उनका परिणाम एक निश्चित समय सीमा में घोषित हो।
- मार्कशीट और डिग्री में सुधार: जिन छात्रों की परीक्षाएं हो चुकी हैं, उनकी मार्कशीट में आ रही तकनीकी खामियों को दूर किया जाए।
- छात्रवृत्ति (Scholarship): पिछले दो वर्षों से रुकी हुई छात्रवृत्ति का तुरंत भुगतान किया जाए।
- प्रशासनिक जवाबदेही: चिकित्सा शिक्षा विभाग (DME) और यूनिवर्सिटी के बीच जो समन्वय की कमी है, उसे दूर किया जाए ताकि छात्रों का नुकसान न हो।
कॉलेज प्रशासन का पक्ष
GRMC प्रबंधन का कहना है कि परीक्षाओं का आयोजन मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (MPMSU), जबलपुर द्वारा किया जाता है। कॉलेज स्तर पर वे केवल शिक्षण और प्रशिक्षण के लिए जिम्मेदार हैं। डीन ने प्रदर्शनकारी छात्रों को समझाते हुए कहा कि वे उनकी मांगों को विश्वविद्यालय और शासन तक पहुँचा रहे हैं। हालांकि, छात्र इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि उन्हें पहले भी कई बार ऐसे ही भरोसे दिए जा चुके हैं।
शैक्षणिक और सामाजिक प्रभाव
यह समस्या केवल ग्वालियर के GRMC तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के पैरामेडिकल छात्र इसी तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। पैरामेडिकल स्टाफ (जैसे लैब टेक्नीशियन, रेडियोलॉजिस्ट आदि) स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ होते हैं। यदि समय पर छात्र पास आउट नहीं होंगे, तो सरकारी अस्पतालों में स्टाफ की कमी बनी रहेगी, जिसका सीधा असर आम जनता के इलाज पर पड़ेगा।
निष्कर्ष: क्या होगा आगे?
फिलहाल, छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटों के भीतर विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षाओं का टाइम-टेबल (Time-table) जारी नहीं किया गया, तो वे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और चक्का जाम करेंगे। प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है क्योंकि मामला सीधे हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है।







