ग्वालियर। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (CM Helpline) के जरिए आम जनता की समस्याओं को हल करने में बरती जा रही ढिलाई पर ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने कड़ा रुख अपनाया है। शासन की प्राथमिकता वाली शिकायतों के निराकरण में रुचि न लेने और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करने पर कलेक्टर ने जिले के 14 राजपत्रित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। साथ ही, इन अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करते हुए आगामी आदेश तक इनका वेतन रोकने (Salary Hold) के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्रशासनिक शिथिलता पर कलेक्टर की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
कलेक्टर रुचिका चौहान ने कार्यभार संभालने के बाद से ही स्पष्ट कर दिया था कि जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन के मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हाल ही में हुई समय-सीमा (TL) पत्रों की समीक्षा बैठक के दौरान यह पाया गया कि कई विभागों में शिकायतें हफ्तों से लंबित पड़ी हैं। विशेष रूप से लेवल-1 (L1) और लेवल-2 (L2) के अधिकारियों ने शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके कारण प्रकरणों का ग्राफ लगातार बढ़ता गया।
कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सीएम हेल्पलाइन केवल एक पोर्टल नहीं है, बल्कि यह जनता का सरकार पर विश्वास है। यदि कोई अधिकारी शिकायत को बिना उचित कारण के लंबित रखता है या उसका भ्रामक निराकरण (Fake Disposal) करता है, तो यह सीधा अनुशासनहीनता का मामला बनता है।
इन विभागों के अधिकारियों पर गिरी गाज
जिन 14 अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें राजस्व, नगर निगम, महिला एवं बाल विकास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) और शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। नोटिस में साफ तौर पर पूछा गया है कि “क्यों न आपके खिलाफ सेवा नियमों के उल्लंघन के तहत विभागीय जांच शुरू की जाए?”
कार्रवाई के मुख्य बिंदु:
- वेतन पर रोक: नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने तक इन अधिकारियों के चालू माह के वेतन आहरण पर रोक लगा दी गई है।
- निलंबन की चेतावनी: यदि एक सप्ताह के भीतर लंबित शिकायतों का संतुष्टिपूर्ण निराकरण नहीं किया गया, तो शासन को इनके निलंबन का प्रस्ताव भेजा जाएगा।
- समीक्षा का अभाव: कलेक्टर ने पाया कि कुछ विभाग प्रमुखों ने अपने मातहतों की समीक्षा ही नहीं की थी।
जनता की संतुष्टि ही पैमाना
बैठक में कलेक्टर ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में निर्देश दिए कि शिकायतों का निराकरण केवल ‘कागजी’ नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “जब तक शिकायतकर्ता संतुष्ट न हो, तब तक प्रकरण को बंद न माना जाए। शिकायतकर्ता से सीधा संवाद करें और मौके पर जाकर समस्या का समाधान करें।”
ग्वालियर प्रशासन अब “जीरो पेंडेंसी” (Zero Pendency) के लक्ष्य पर काम कर रहा है। कलेक्टर ने ई-गवर्नेंस टीम को भी निर्देशित किया है कि वे शिकायतों की डेली रिपोर्ट सीधे उनके डैशबोर्ड पर उपलब्ध कराएं ताकि वे खुद हर शाम इसकी मॉनिटरिंग कर सकें।
भविष्य के लिए कड़ा संदेश
इस कार्रवाई से जिले के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। यह पहली बार नहीं है जब रुचिका चौहान ने सख्त तेवर दिखाए हैं, लेकिन एक साथ 14 अधिकारियों का वेतन रोकने के निर्देश देना यह संकेत है कि अब “काम नहीं तो वेतन नहीं” की नीति अपनाई जाएगी।
प्रशासन के इस कदम की आम जनता ने सराहना की है। लोगों का मानना है कि अधिकारियों की जवाबदेही तय होने से उनकी फाइलों को अब दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।






