ग्वालियर। कहते हैं कि बेटियाँ जब आसमान छूने का सपना देखती हैं, तो पूरा शहर गर्व से अपना सिर ऊँचा कर लेता है। लेकिन जब वही आसमान किसी की आँखों का तारा छीन ले, तो वह दर्द शब्दों में बयां करना नामुमकिन हो जाता है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में ग्वालियर के वसंत विहार की रहने वाली 25 वर्षीय होनहार को-पायलट शांभवी पाठक के निधन ने न केवल उनके परिवार को, बल्कि पूरे ग्वालियर शहर को झकझोर कर रख दिया है।
बचपन से था आसमान फतह करने का जुनून
शांभवी पाठक महज 25 वर्ष की थीं, लेकिन उनके हौसले किसी अनुभवी पायलट से कम नहीं थे। ग्वालियर के वसंत विहार जैसे शांत इलाके में पली-बढ़ी शांभवी ने बचपन से ही बादलों के बीच रास्ता बनाने का सपना देखा था। उनके पिता और परिवार ने हमेशा उनकी इस उड़ान को पंख दिए। पढ़ाई में मेधावी रहने वाली शांभवी ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर कम उम्र में ही ‘कमर्शियल पायलट लाइसेंस’ हासिल कर लिया था। उनकी उपलब्धि पर पूरे मोहल्ले को गर्व था, लेकिन किसी को क्या पता था कि जिस आसमान को उन्होंने अपना कार्यक्षेत्र चुना, वही उनकी अंतिम यात्रा का गवाह बनेगा।
वह आखिरी ‘गुड मॉर्निंग’ मैसेज
हादसे वाले दिन की सुबह भी आम दिनों की तरह ही शुरू हुई थी। शांभवी ने उड़ान भरने से कुछ समय पहले अपनी प्रिय दादी को व्हाट्सएप पर “गुड मॉर्निंग” का संदेश भेजा था। यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। वह अपनी दादी और माता-पिता के बेहद करीब थीं और हर उड़ान से पहले या बाद में उनसे बात करना नहीं भूलती थीं। परिवार के लिए वह संदेश अब एक ऐसी याद बन गया है, जो ताउम्र उन्हें रुलाता रहेगा। दादी को क्या पता था कि उनकी लाडली का यह आखिरी पैगाम है और कुछ घंटों बाद उसकी आवाज़ हमेशा के लिए खामोश हो जाएगी।
हादसे की भयावहता और शांभवी का बलिदान
महाराष्ट्र में हुए इस वीवीआईपी विमान हादसे में तकनीकी खराबी या खराब मौसम को शुरुआती कारण माना जा रहा है। विमान में उपमुख्यमंत्री अजित पवार भी सवार थे। प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, चालक दल ने अंतिम क्षणों तक विमान को सुरक्षित उतारने या आबादी वाले क्षेत्र से दूर ले जाने की कोशिश की होगी। एक को-पायलट के तौर पर शांभवी अपनी ड्यूटी के प्रति पूरी तरह समर्पित थीं। इस हादसे में विमान के परखच्चे उड़ गए और बचाव दल के पहुँचने तक सब कुछ खत्म हो चुका था।
ग्वालियर में शोक की लहर
जैसे ही शांभवी के निधन की खबर ग्वालियर पहुँची, उनके निवास स्थान वसंत विहार में सन्नाटा पसर गया। रिश्तेदार, पड़ोसी और शहर के गणमान्य नागरिक उनके घर सांत्वना देने पहुँचने लगे। हर आँख नम थी और हर ज़ुबान पर शांभवी की सादगी और उनकी मेहनत के किस्से थे। स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने भी शोक संवेदनाएँ व्यक्त की हैं। शांभवी केवल एक पायलट नहीं थीं, बल्कि उन हज़ारों लड़कियों के लिए प्रेरणा थीं जो छोटे शहरों से निकलकर विमानन (Aviation) के क्षेत्र में करियर बनाना चाहती हैं।
एक अपूरणीय क्षति
शांभवी पाठक का जाना केवल उनके परिवार की व्यक्तिगत क्षति नहीं है, बल्कि देश ने एक युवा और ऊर्जावान पेशेवर को खो दिया है। विमानन जगत में सुरक्षा मानकों और तकनीकी खामियों पर बहस फिर से शुरू हो गई है, लेकिन इन सबके बीच एक परिवार ने अपनी उस बेटी को खो दिया है जिसने अभी जीवन के कई बसंत देखने थे।
शांभवी की शहादत और उनकी मेहनत को ग्वालियर हमेशा याद रखेगा। वह भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन ग्वालियर के आकाश में जब भी कोई विमान उड़ेगा, वह शांभवी जैसी साहसी बेटियों के सपनों की याद दिलाता रहेगा।







