ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर ग्वालियर की सड़कों पर अक्सर रसूख और रुतबे की नुमाइश करने वाली गाड़ियाँ अब पुलिस के निशाने पर हैं। शनिवार, 24 जनवरी 2026 को ग्वालियर ट्रैफिक पुलिस ने एक विशेष अभियान चलाते हुए उन ‘प्रभावशाली’ लोगों को सख्त संदेश दिया है जो नियमों को अपने पैरों तले रौंदते हैं। पुलिस ने आज शहर के प्रमुख चौराहों पर घेराबंदी कर काली फिल्म (Tinted Glass), हूटर और अवैध नंबर प्लेट वाली वीआईपी कारों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की है।
अभियान की शुरुआत: जब आमने-सामने आए ‘कानून’ और ‘रसूख’
आज सुबह से ही ग्वालियर के पड़ाव चौराहा, फूलबाग और गोले का मंदिर जैसे व्यस्त इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य उन लग्जरी कारों को रोकना था जिनके शीशों पर डार्क काली फिल्म चढ़ी हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, कई रसूखदार लोग अपनी पहचान छिपाने या ‘स्वैग’ के चक्कर में काली फिल्म का उपयोग कर रहे थे।
कार्रवाई के दौरान कई ऐसे मौके आए जब रसूखदारों ने पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश की। कुछ लोगों ने बड़े नेताओं और अधिकारियों को फोन लगाने के प्रयास किए, लेकिन पुलिस अधीक्षक (SP) के सख्त निर्देशों के कारण अधिकारियों ने किसी की एक न सुनी।
हाई-प्रोफाइल मामला: सफेद रंग की SUV पर गिरा ‘कानून का डंडा’
आज की कार्रवाई में सबसे ज्यादा चर्चा एक सफेद रंग की हाई-एंड SUV की रही, जो कथित तौर पर एक स्थानीय प्रभावशाली नेता के करीबी की बताई जा रही है।
- उल्लंघन: इस गाड़ी के शीशों पर न केवल 100% काली फिल्म थी, बल्कि नंबर प्लेट पर पदनाम लिखा हुआ था और अवैध रूप से हूटर लगा था।
- पुलिस का जवाब: जब चालक ने पुलिसकर्मी से बहस की, तो मौके पर मौजूद ट्रैफिक डीएसपी ने स्वयं खड़े होकर फिल्म उतरवाई और ₹5000 से अधिक का चालान थमा दिया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि “सड़क पर हर नागरिक बराबर है, पद और प्रतिष्ठा घर के अंदर के लिए है।”
हूटर और नंबर प्लेट पर भी गाज
पुलिस ने केवल काली फिल्म ही नहीं, बल्कि उन कारों को भी निशाना बनाया जो बेवजह हूटर बजाकर आम जनता में दहशत पैदा करती हैं।
- अवैध नंबर प्लेट: कई गाड़ियों पर नंबर के बजाय ‘अध्यक्ष’, ‘महासचिव’ या ‘भैयाजी’ जैसे शब्द लिखे मिले। पुलिस ने इन नंबर प्लेट्स को मौके पर ही हटवाया और पेंट से सही नंबर लिखवाए।
- हूटर ज़ब्ती: बिना अनुमति लगे हूटरों को काट कर ज़ब्त कर लिया गया।
सुरक्षा के लिहाज से क्यों जरूरी है यह सख्ती?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि काली फिल्म वाली गाड़ियाँ सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं।
- अपराध की आशंका: बंद शीशों के पीछे अपराधी हथियारों या अवैध सामग्री की तस्करी आसानी से कर सकते हैं।
- सीसीटीवी की विफलता: काली फिल्म के कारण सीसीटीवी कैमरों में चालक का चेहरा नहीं आता, जिससे हिट एंड रन जैसे मामलों में आरोपी को पकड़ना मुश्किल हो जाता है।
- गणतंत्र दिवस सुरक्षा: 26 जनवरी से पहले शहर की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए यह चेकिंग अनिवार्य थी।
ट्रैफिक पुलिस का आंकड़ा
आज शाम तक की रिपोर्ट के अनुसार:
- कुल 150 से अधिक चालान काटे गए।
- 45 कारों से काली फिल्म मौके पर ही हटवाई गई।
- 12 अवैध हूटर ज़ब्त किए गए।
- लगभग ₹1.5 लाख से अधिक का जुर्माना वसूला गया।
जनता ने किया स्वागत
सोशल मीडिया पर ग्वालियर के नागरिकों ने इस कार्रवाई की जमकर सराहना की है। लोगों का कहना है कि शहर में वीआईपी कल्चर के कारण ट्रैफिक नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही थीं, जिसे रोकने के लिए ऐसी सख्ती की बहुत जरूरत थी।
निष्कर्ष
ग्वालियर पुलिस का यह ‘क्लीन ड्राइव’ अभियान आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा। पुलिस ने साफ कर दिया है कि रसूख चाहे कितना भी बड़ा हो, वह कानून से बड़ा नहीं हो सकता। इस कार्रवाई ने यह भी साबित किया है कि अगर प्रशासन ठान ले, तो सड़कों पर अनुशासन बहाल करना नामुमकिन नहीं है।







