ठगी का नया और खतरनाक तरीका
ग्वालियर के हजीरा, पुरानी छावनी और मुरार जैसे इलाकों में ठगी का एक बेहद शातिर पैटर्न सामने आया है। ठगों का यह गिरोह खुद को ‘महिला एवं बाल विकास विभाग’ का सर्वे अधिकारी बताकर बस्तियों में पहुंच रहा है। ये अपराधी महिलाओं को विश्वास दिलाते हैं कि सरकार ‘लाड़ली बहना योजना’ के तहत मिलने वाली राशि को ₹1250 से बढ़ाकर ₹3000 करने जा रही है। इस बढ़ी हुई राशि का लाभ पाने के लिए वे महिलाओं से “केवाईसी अपडेट” (KYC Update) और “फिंगरप्रिंट वेरिफिकेशन” कराने को कहते हैं।
बायोमेट्रिक डेटा की चोरी और खातों से निकासी
ठगी की असली प्रक्रिया तब शुरू होती है जब ये जालसाज अपने साथ लाए गए मोबाइल ऐप या छोटी बायोमेट्रिक मशीन पर महिलाओं के अंगूठे का निशान लेते हैं। जैसे ही कोई महिला मशीन पर अंगूठा लगाती है, ठग उसके ‘आधार सक्षम भुगतान प्रणाली’ (AePS) का एक्सेस प्राप्त कर लेते हैं। इसके बाद, महिला के बैंक खाते से पैसे किसी अन्य वॉलेट में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कई मामलों में महिलाओं के पास ओटीपी (OTP) भी नहीं आता, क्योंकि ट्रांजेक्शन बायोमेट्रिक के जरिए होता है। हजीरा इलाके की एक पीड़ित महिला ने बताया कि उसके खाते से मजदूरी के रखे ₹8,000 पल भर में गायब हो गए।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पीड़िता का वीडियो
इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब ग्वालियर के एक स्थानीय सोशल मीडिया पेज पर एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें एक बुजुर्ग महिला बीच सड़क पर रोते हुए अपनी आपबीती सुना रही है कि कैसे दो युवक फॉर्म भरने के नाम पर उसका अंगूठा लगवाकर ले गए और थोड़ी देर बाद बैंक से पैसे कटने का मैसेज आ गया। इस वीडियो के सामने आने के बाद ग्वालियर एसपी ने तत्काल संज्ञान लिया और साइबर सेल को जांच के निर्देश दिए। प्राथमिक जांच में पता चला है कि यह गिरोह शहर के उन इलाकों को निशाना बना रहा है जहाँ शिक्षा का अभाव है और महिलाएं सरकारी योजनाओं के लिए उत्साहित रहती हैं।
प्रशासन और पुलिस की सख्त चेतावनी
ग्वालियर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने संयुक्त रूप से एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि:
- ‘लाड़ली बहना योजना’ या किसी भी सरकारी योजना का रजिस्ट्रेशन केवल निर्धारित केंद्रों (जैसे आंगनवाड़ी या नगर निगम कार्यालय) पर ही होता है।
- कोई भी सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर बायोमेट्रिक या फिंगरप्रिंट नहीं मांगता।
- यदि कोई व्यक्ति घर आकर आधार नंबर या अंगूठा लगाने के लिए कहे, तो तुरंत डायल 100 पर सूचना दें।
- अपने मोबाइल पर आने वाले किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
साइबर सेल की कार्रवाई
ग्वालियर साइबर सेल की टीमें उन मोबाइल टावर लोकेशन्स की जांच कर रही हैं जहाँ ये ठग सक्रिय थे। पुलिस को संदेह है कि यह गिरोह झारखंड के जामताड़ा या मेवात के ठगों से जुड़ा हो सकता है, जो अब स्थानीय लड़कों को कमीशन पर इस काम में लगा रहे हैं। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालकर दो संदिग्धों के हुलिए भी जारी किए हैं। बैंक अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी खाते से अचानक संदिग्ध तरीके से AePS ट्रांजेक्शन होते हैं, तो उसकी सूचना पुलिस को दें।
जागरूकता ही बचाव है
समाजसेवी संगठनों ने भी बस्तियों में जाकर महिलाओं को जागरूक करना शुरू कर दिया है। महिलाओं को समझाया जा रहा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए कभी भी अपनी निजी बैंकिंग जानकारी साझा न करें। ग्वालियर कलेक्टर ने भी जनता से अपील की है कि वे इस प्रकार के बहकावे में न आएं और केवल आधिकारिक घोषणाओं पर ही भरोसा करें।







