अभियान की पृष्ठभूमि और सख्त आदेश
मकर संक्रांति के अवसर पर ग्वालियर में पतंगबाजी का जबरदस्त क्रेज रहता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ‘चाइनीज’ और धात्विक चूर्ण युक्त ‘कॉटन’ मांझे के कारण कई बेगुनाह पक्षियों की मौत हुई है और दोपहिया वाहन चालकों के गले कटने की दुखद घटनाएं सामने आई हैं। इसे देखते हुए ग्वालियर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने शहर में कांच और लोहे के बुरादे से बने धागों की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। इसी आदेश के पालन में आज ग्वालियर के लश्कर, मुरार और हजीरा जैसे प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में पुलिस की विशेष टीमों ने अचानक छापेमारी की।
बाजारों में हड़कंप और बरामदगी
पुलिस की कार्रवाई सुबह 11 बजे शुरू हुई, जब क्राइम ब्रांच और स्थानीय थानों की पुलिस ने संयुक्त रूप से ‘पतंग बाजार’ (खासगी बाजार और डीडवाना ओली) की घेराबंदी की। पुलिस को सूचना मिली थी कि कई दुकानदार प्रतिबंधित मांझे को ‘कॉटन मांझा’ या ‘मोनो-काइट’ के नाम से पीछे के दरवाजों से बेच रहे हैं। छापेमारी के दौरान पुलिस ने दुकानों के गुप्त गोदामों और बेसमेंट से सैकड़ों चरखियां बरामद कीं। यह मांझा इतना धारदार था कि प्लास्टिक और चमड़े को भी आसानी से काट सकता था। पुलिस ने लगभग 3 लाख रुपये से अधिक मूल्य का अवैध मांझा जब्त किया है और उसे नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
दुकानदारों की चालाकी और पुलिस की रणनीति
पकड़े गए दुकानदारों ने पुलिस को चकमा देने के लिए कई हथकंडे अपनाए थे। प्रतिबंधित मांझे को सामान्य सूती धागे के डिब्बों में पैक करके रखा गया था। कुछ दुकानदार केवल अपने परिचित ग्राहकों को ही कोडवर्ड में यह माल बेच रहे थे। पुलिस ने सादे कपड़ों में जवानों को ‘फर्जी ग्राहक’ बनाकर भेजा, जिससे इस अवैध कारोबार का पर्दाफाश हुआ। पुलिस ने मौके से 5 प्रमुख थोक व्यापारियों को हिरासत में लिया है और उनके खिलाफ धारा 188 (सरकारी आदेश का उल्लंघन) और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए हैं।
पक्षियों और इंसानों के लिए खतरा
वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, इस मांझे में कांच के बारीक टुकड़े और सिंथेटिक केमिकल होते हैं, जो कभी खत्म नहीं होते। यदि यह मांझा पेड़ों पर फंस जाता है, तो महीनों तक पक्षियों के लिए ‘फांसी का फंदा’ बना रहता है। ग्वालियर के कई सामाजिक संगठनों ने भी पुलिस की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। ‘इको-फ्रेंडली’ पतंगबाजी को बढ़ावा देने के लिए युवाओं से अपील की जा रही है कि वे केवल साधारण सद्दी (सूती धागे) का उपयोग करें, जिससे किसी की जान को खतरा न हो।
प्रशासन की चेतावनी: ड्रोन से होगी निगरानी
ग्वालियर पुलिस अधीक्षक ने चेतावनी दी है कि यह कार्रवाई केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहेगी। मकर संक्रांति के दिन छतों पर पतंगबाजी के दौरान भी पुलिस की टीमें नजर रखेंगी। कुछ संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों का उपयोग किया जाएगा ताकि यह देखा जा सके कि कहीं कोई प्रतिबंधित मांझे का उपयोग तो नहीं कर रहा है। यदि किसी के पास से जानलेवा मांझा पाया जाता है या किसी घटना में उसकी संलिप्तता मिलती है, तो उसके खिलाफ ‘रासुका’ (NSA) जैसी कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है।
जनता से सहयोग की अपील
पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे ऐसे अवैध विक्रेताओं की सूचना तत्काल कंट्रोल रूम को दें। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा। साथ ही, अभिभावकों से भी कहा गया है कि वे अपने बच्चों को कांच वाले मांझे के खतरों के बारे में समझाएं और उन्हें सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाने के लिए प्रेरित करें। ग्वालियर प्रशासन का लक्ष्य इस बार ‘जीरो कैजुअल्टी’ (शून्य दुर्घटना) के साथ संक्रांति का पर्व संपन्न कराना है।







