ग्वालियर। आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले फर्जी डॉक्टरों और अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों के खिलाफ ग्वालियर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने अब आर-पार की जंग छेड़ दी है। बुधवार को कलेक्टर के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमों ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में छापामार कार्रवाई की, जिससे अवैध रूप से चिकित्सा संस्थान चलाने वालों में हड़कंप मच गया। इस कार्रवाई के दौरान पाँच प्रमुख क्लीनिकों को सील किया गया है, जहाँ बिना विशेषज्ञता और बिना अनुमति के मरीजों का इलाज किया जा रहा था।
शिकायत के बाद हरकत में आया विभाग
पिछले कुछ समय से प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि शहर के बाहरी इलाकों और घनी आबादी वाले मोहल्लों में ऐसे लोग एलोपैथी क्लिनिक चला रहे हैं, जिनके पास या तो डिग्री नहीं है या फिर वे वैकल्पिक चिकित्सा (जैसे BHMS या BAMS) की डिग्री लेकर गंभीर एलोपैथी उपचार और छोटी सर्जरी कर रहे हैं। इन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के नेतृत्व में तीन अलग-अलग टीमें गठित की गईं।
छापेमारी में खुले राज: नर्सिंग स्टाफ बन गए ‘डॉक्टर’
आज की कार्रवाई मुख्य रूप से हजीरा, पुरानी छावनी और मुरार जैसे क्षेत्रों में केंद्रित रही। जाँच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। एक क्लीनिक पर पाया गया कि वहां केवल ANM (नर्सिंग) का कोर्स किए हुए व्यक्ति द्वारा मरीजों को ड्रिप लगाई जा रही थी और एंटीबायोटिक दवाओं के हाई डोज दिए जा रहे थे।
जब टीम ने संबंधित क्लीनिक संचालकों से क्लीनिक के रजिस्ट्रेशन (Nursing Home Act के तहत) और उनकी मेडिकल डिग्री के दस्तावेज मांगे, तो वे कोई भी वैध कागज पेश नहीं कर सके। कई जगहों पर तो क्लीनिक के भीतर ही अनधिकृत रूप से ‘पैथोलॉजी लैब’ भी संचालित पाई गई, जहाँ मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।
सील किए गए क्लीनिक और जब्त दवाएं
प्रशासन ने आज की कार्रवाई में पाँच क्लीनिकों को पूरी तरह सील कर दिया है। इन क्लीनिकों से भारी मात्रा में ऐसी दवाएं भी जब्त की गई हैं, जिन्हें केवल विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह पर ही दिया जा सकता है। सील किए गए क्लीनिकों में पाया गया कि वहां मरीजों को भर्ती करने के लिए छोटे-छोटे कमरे और बेड भी लगा रखे थे, जबकि उनके पास ‘इनडोर पेशेंट’ रखने की कोई अनुमति नहीं थी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ये क्लीनिक न केवल नियमों का उल्लंघन कर रहे थे, बल्कि यहाँ बायो-मेडिकल वेस्ट (अस्पताल के कचरे) के निस्तारण की भी कोई व्यवस्था नहीं थी, जो आसपास के क्षेत्र में संक्रमण फैला सकता था।
‘झोलाछाप’ डॉक्टरों को प्रशासन की कड़ी चेतावनी
कार्रवाई के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने साफ कहा कि ग्वालियर में बिना डिग्री और बिना पंजीयन के क्लीनिक चलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपनी जान जोखिम में डालकर ऐसे ‘झोलाछाप’ डॉक्टरों के पास न जाएं।
प्रशासन की आगामी रणनीति:
- सभी निजी क्लीनिकों के डिग्री और रजिस्ट्रेशन का औचक निरीक्षण जारी रहेगा।
- नर्सिंग होम एक्ट का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना और एफआईआर दर्ज की जाएगी।
- मेडिकल स्टोर संचालकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना वैध पर्चे के प्रतिबंधित दवाएं न बेचें।
निष्कर्ष: स्वास्थ्य सुविधाओं में शुचिता की जरूरत
ग्वालियर जैसे विकसित होते शहर में स्वास्थ्य सेवाओं का सुलभ होना अच्छी बात है, लेकिन इसकी आड़ में अवैध क्लीनिकों का फलना-फूलना चिंताजनक है। प्रशासन की इस कार्रवाई ने उन लोगों को कड़ा संदेश दिया है जो इंसानी जान की कीमत पर अपना व्यापार चला रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई नियमित रूप से होनी चाहिए ताकि शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था पारदर्शी और सुरक्षित बनी रहे।







