ग्वालियर शहर को व्यवस्थित और जाम मुक्त बनाने की दिशा में नगर निगम और जिला प्रशासन ने आज एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। शहर के अलग-अलग अंचलों में वर्षों से जमे अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासन का ‘पीला पंजा’ (बुलडोजर) गरजा। आज की इस सख्त कार्रवाई में नगर निगम की रिमूवल टीम ने 5 अवैध मकान, 4 दुकानें और दर्जनों पक्के चबूतरे ढहा दिए।
इस कार्रवाई ने उन लोगों के बीच हड़कंप मचा दिया है जिन्होंने सरकारी जमीनों या फुटपाथों पर अवैध रूप से कब्जा जमा रखा था।
सुबह 6 बजे से शुरू हुआ ‘ऑपरेशन क्लीन’
नगर निगम का अमला आज तड़के ही भारी पुलिस बल के साथ सड़कों पर उतर आया। कार्रवाई की शुरुआत शहर के व्यस्ततम महाराज बाड़ा और लश्कर क्षेत्र के आसपास के इलाकों से हुई। प्रशासन को अंदेशा था कि विरोध हो सकता है, इसलिए मौके पर तीन थानों की पुलिस और महिला बल तैनात किया गया था।
- अवैध मकानों पर प्रहार: प्रशासन ने उन 5 मकानों को निशाना बनाया जो बिना किसी स्वीकृत मानचित्र (Map) के सरकारी जमीन या ग्रीन बेल्ट एरिया में बनाए गए थे। कई बार नोटिस देने के बावजूद जब कब्जे नहीं हटाए गए, तो बुलडोजर ने चंद घंटों में इन्हें मलबे के ढेर में बदल दिया।
- बाजारों में दुकानों पर एक्शन: मुख्य मार्ग को बाधित कर रही 4 अवैध दुकानों को भी पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। ये दुकानें न केवल सड़क की चौड़ाई कम कर रही थीं, बल्कि इनके कारण आए दिन ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती थी।
फुटपाथों से हटे चबूतरे और अवैध शेड
आज की कार्रवाई केवल इमारतों तक सीमित नहीं रही। ग्वालियर की सड़कों के किनारे दुकानदारों द्वारा बढ़ाए गए चबूतरे, पक्के रैम्प और अवैध लोहे के शेड को भी कटर और जेसीबी की मदद से हटा दिया गया।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि दुकानदारों ने अपनी सीमा से 5 से 10 फीट बाहर तक पक्के निर्माण कर लिए थे, जिससे पैदल चलने वालों के लिए जगह ही नहीं बची थी।
विरोध के स्वर, पर प्रशासन का कड़ा रुख
कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानों पर स्थानीय निवासियों और दुकानदारों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। कुछ लोगों ने मोहलत की मांग की, तो कुछ ने इस कार्रवाई को भेदभावपूर्ण बताया। हालांकि, नगर निगम कमिश्नर ने स्पष्ट कर दिया कि यह अभियान किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि शहर के सुनियोजित विकास के लिए है।
“हमने सभी अतिक्रमणकारियों को 15 दिन पहले ही अंतिम नोटिस जारी कर दिया था। शहर के सार्वजनिक हितों के साथ समझौता नहीं किया जाएगा। सरकारी जमीन पर कब्जा करना अपराध है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” – नगर निगम अधिकारी
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में बाधा थे ये निर्माण
ग्वालियर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए कई सड़कों का चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण प्रस्तावित है। आज जिन निर्माणों को हटाया गया, वे सीधे तौर पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की राह में रोड़ा अटका रहे थे। विशेष रूप से जल निकासी (Drainage) की नालियों के ऊपर बने चबूतरे मानसून से पहले हटाना प्रशासन की प्राथमिकता थी ताकि शहर में जलभराव की स्थिति न बने।
अगला कदम: जुर्माने के साथ रिकवरी
प्रशासन ने न केवल अतिक्रमण हटाया है, बल्कि एक नया कड़ा नियम भी लागू किया है। अब इन अवैध निर्माणों को तोड़ने में जो खर्च (मजदूरी, डीजल और मशीनरी का किराया) आया है, उसकी वसूली भी संबंधित अतिक्रमणकारियों से ही की जाएगी। यदि वे भुगतान नहीं करते हैं, तो उनके अन्य संपत्तियों पर कुर्की की कार्रवाई की जा सकती है।
निष्कर्ष
ग्वालियर नगर निगम का ‘पीला पंजा’ आज उन लोगों के लिए चेतावनी बनकर आया है जो कानून को ताक पर रखकर सरकारी संपत्तियों पर कुंडली मारकर बैठे हैं। इस कार्रवाई से शहर की सड़कों ने आज कुछ राहत की सांस ली है। प्रशासन का दावा है कि यह अभियान अभी थमेगा नहीं और शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।







