आज 26 जनवरी 2026 को जब देश अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, दिल्ली का कर्तव्य पथ एक बार फिर इतिहास का गवाह बना। इस वर्ष की परेड में मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर ग्वालियर ने अपनी सांस्कृतिक विरासत और युवाओं के अनुशासन का ऐसा लोहा मनवाया कि हर कोई दंग रह गया। ग्वालियर के कुल 68 युवाओं ने इस गौरवशाली परेड में हिस्सा लेकर न केवल शहर का, बल्कि पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है।
सिंधिया स्कूल के ब्रास बैंड की गूँज
परेड के सबसे आकर्षण केंद्रों में से एक रहा ग्वालियर के विश्वप्रसिद्ध सिंधिया स्कूल (फोर्ट) का ब्रास बैंड। यह कोई सामान्य उपलब्धि नहीं है; सिंधिया स्कूल के इस बैंड को उनकी उत्कृष्ट लयबद्धता और कड़े अनुशासन के कारण देश के चुनिंदा स्कूलों में से चुना गया था।
बैंड के सदस्यों ने जब कर्तव्य पथ पर अपनी कदमताल के साथ ‘सारे जहाँ से अच्छा’ और ‘कदम-कदम बढ़ाए जा’ जैसी धुनें छेड़ीं, तो वहां मौजूद जनसैलाब तालियां बजाने पर मजबूर हो गया। इन छात्रों ने महीनों तक कड़ा अभ्यास किया था, जिसका परिणाम आज उनकी सटीक जुगलबंदी में दिखाई दिया। सेना के बैंड्स के बीच एक स्कूली बैंड का इतनी परिपक्वता के साथ प्रदर्शन करना ग्वालियर की शिक्षा और अनुशासन की परंपरा को दर्शाता है।
कथक के जरिए बिखरे ग्वालियर घराने के रंग
संगीत की नगरी ग्वालियर का जिक्र हो और वहां की कला का प्रदर्शन न हो, यह मुमकिन नहीं। राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की छात्राओं ने इस बार परेड में ‘सांस्कृतिक गौरव’ का प्रतिनिधित्व किया।
लगभग 30 से अधिक छात्राओं के दल ने कर्तव्य पथ पर कथक नृत्य की ऐसी प्रस्तुति दी कि लगा मानो तानसेन की नगरी की आत्मा दिल्ली की सड़कों पर उतर आई हो। उनके पैरों की थिरकन, ताल और भावों ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की शक्ति को विश्व पटल पर रखा। पारंपरिक वेशभूषा में सजी इन छात्राओं ने अपनी कला के माध्यम से यह संदेश दिया कि आधुनिक भारत अपनी जड़ों और अपनी लोक संस्कृति से आज भी उतनी ही गहराई से जुड़ा हुआ है।
68 युवाओं का जज्बा और मेहनत
ग्वालियर से दिल्ली तक का यह सफर इन 68 युवाओं के लिए आसान नहीं था। इसमें एनसीसी (NCC) कैडेट्स, एनएसएस (NSS) के स्वयंसेवक और कलाकार शामिल थे।
- चयन प्रक्रिया: इन युवाओं का चयन कई कड़े पैमानों पर हुआ, जिसमें फिजिकल फिटनेस से लेकर कलात्मक निपुणता तक शामिल थी।
- प्रशिक्षण: पिछले कई हफ्तों से ये युवा कड़कड़ाती ठंड में सुबह 4 बजे से अभ्यास कर रहे थे।
- विविधता: इस दल में ग्वालियर के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के प्रतिभाशाली छात्र शामिल थे, जो ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को साकार कर रहे थे।
ग्वालियर के लिए गर्व का क्षण
यह पहली बार नहीं है जब ग्वालियर ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, लेकिन इस वर्ष का प्रदर्शन संख्या और विविधता के लिहाज से ऐतिहासिक रहा। सिंधिया स्कूल के संगीत और मानसिंह तोमर विश्वविद्यालय की कला ने मिलकर यह सिद्ध कर दिया कि ग्वालियर सिर्फ किलों का शहर नहीं, बल्कि प्रतिभाओं की खान है।
जब यह दल कर्तव्य पथ से गुजरा, तो कमेंट्री बॉक्स से भी ग्वालियर की ऐतिहासिकता और संगीत घराने का विशेष उल्लेख किया गया। यह उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो आने वाले वर्षों में देश की सेवा और कला के क्षेत्र में अपना नाम कमाना चाहते हैं।
निष्कर्ष
गणतंत्र दिवस की इस परेड ने यह स्पष्ट कर दिया कि ग्वालियर के युवाओं में नेतृत्व करने की क्षमता और अपनी संस्कृति को संजोने का जुनून कूट-कूट कर भरा है। कर्तव्य पथ पर बिखरा यह जलवा आने वाले कई दशकों तक ग्वालियर के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेगा।







