ग्वालियर। उत्तर भारत में सक्रिय हुए तीव्र पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से ग्वालियर सहित पूरे चंबल संभाग में मौसम का मिजाज अचानक बदलने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के लिए भारी बारिश और ओलावृष्टि का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। अगले 48 घंटों के भीतर शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में तेज हवाओं के साथ ‘मावठा’ गिरने की प्रबल संभावना है, जो जनजीवन और खेती दोनों को प्रभावित करेगा।
क्यों बदला मौसम का मिजाज?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के ऊपर एक शक्तिशाली चक्रवाती परिसंचरण बना है, जिसने अरब सागर से बड़ी मात्रा में नमी खींची है। इसके प्रभाव से मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्से, विशेषकर ग्वालियर, दतिया, भिंड और मुरैना में गरज-चमक के साथ बारिश की स्थिति बन रही है। इसे स्थानीय भाषा में ‘मावठा’ कहा जाता है, जो सर्दियों के मौसम में होने वाली वर्षा है।
ओलावृष्टि की चेतावनी और संभावित प्रभाव
मौसम विभाग ने विशेष रूप से चेतावनी दी है कि बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चलेंगी।
- ओलावृष्टि का डर: ग्वालियर के डबरा, भितरवार और घाटीगांव जैसे क्षेत्रों में ओले गिरने की संभावना जताई गई है। ओले गिरने से तापमान में भारी गिरावट आएगी और फसलों को नुकसान हो सकता है।
- तापमान में गिरावट: वर्तमान में जो न्यूनतम तापमान 8-10°C के आसपास बना हुआ है, बारिश के बाद उसके 5°C तक गिरने की संभावना है, जिससे कड़ाके की ठंड का दूसरा दौर शुरू होगा।
किसानों की चिंता: सोना या आफत?
इस समय खेतों में गेहूं, सरसों और चने की फसलें खड़ी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि:
- फायदेमंद: हल्की बारिश गेहूं की फसल के लिए ‘अमृत’ समान साबित होगी, जिससे दाना पुष्ट होगा।
- नुकसानदेह: यदि बारिश के साथ तेज हवाएं चलती हैं और ओले गिरते हैं, तो सरसों की फसल (जो पकने की स्थिति में है) झड़ सकती है और गेहूं की फसल बिछ सकती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
प्रशासन की तैयारी और एडवाइजरी
ग्वालियर जिला प्रशासन ने संभावित ओलावृष्टि को देखते हुए राजस्व विभाग और कृषि विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने सभी पटवारियों को आदेश दिया है कि यदि ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान होता है, तो तत्काल सर्वे की प्रक्रिया शुरू की जाए।
आम जनता के लिए दिशा-निर्देश:
- बिजली से बचाव: गरज-चमक के दौरान पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े न हों।
- वाहन सावधानी से चलाएं: बारिश और कोहरे के कारण दृश्यता (Visibility) कम हो सकती है, इसलिए हाईवे पर वाहन धीमी गति से चलाएं।
- स्वास्थ्य का ध्यान: अचानक होने वाले इस मौसमी बदलाव से बच्चों और बुजुर्गों में वायरल इंफेक्शन और निमोनिया का खतरा बढ़ सकता है, अतः गर्म कपड़ों का उपयोग जारी रखें।
कोहरे का ‘डबल अटैक’
बारिश थमने के बाद, यानी 25 जनवरी से पूरे ग्वालियर संभाग में ‘घना कोहरा’ (Dense Fog) छाने का अनुमान है। इससे रेल और हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। दिल्ली-भोपाल मार्ग पर चलने वाली ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से चल सकती हैं।
निष्कर्ष
ग्वालियर के लिए यह ‘मावठा’ दोहरी चुनौती लेकर आ रहा है। एक तरफ जहाँ यह रबी की फसलों के लिए सिंचाई का खर्च बचाएगा, वहीं ओलावृष्टि का खतरा किसानों की धड़कनें बढ़ा रहा है। शहरवासियों को अगले दो दिनों तक घर से बाहर निकलते समय रेनकोट और छतरी के साथ-साथ कड़ाके की ठंड के लिए तैयार रहना होगा।







