ग्वालियर: बर्फीली हवाओं की चपेट में शहर ग्वालियर और चंबल संभाग में एक बार फिर मौसम ने करवट ली है। उत्तर भारत से आ रही सीधी बर्फीली हवाओं के कारण ग्वालियर में कड़ाके की ठंड का दौर शुरू हो गया है। आज सुबह शहर का न्यूनतम तापमान लुढ़ककर 11°C दर्ज किया गया, जबकि ठंडी हवाओं (Wind Chill Factor) के कारण महसूस होने वाला तापमान इससे भी कम रहा। मौसम विभाग (IMD) ने अगले 48 से 72 घंटों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी करते हुए चेतावनी दी है कि शहर में शीतलहर (Cold Wave) का प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है।
घने कोहरे ने थामी रफ्तार
ठंड के साथ-साथ ग्वालियर में कोहरे का जबरदस्त असर देखा जा रहा है। सुबह के समय दृश्यता (Visibility) घटकर मात्र 50 से 100 मीटर रह गई है, जिसने शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।
- यातायात पर प्रभाव: कोहरे के कारण ग्वालियर से गुजरने वाली कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 3 से 6 घंटे की देरी से चल रही हैं। वहीं, दिल्ली-आगरा-ग्वालियर हाईवे पर वाहनों की गति धीमी हो गई है। प्रशासन ने वाहन चालकों को फॉग लाइट का उपयोग करने और सावधानी से चलने की सलाह दी है।
- हवाई सेवाएं: ग्वालियर एयरपोर्ट पर भी कम विजिबिलिटी के कारण उड़ानों के संचालन में दिक्कतें आ रही हैं, जिससे यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आम जनजीवन और स्वास्थ्य पर असर
लगातार गिरते तापमान ने आम आदमी की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित किया है। सुबह और शाम के समय बाजारों में सन्नाटा पसरा रहता है और लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं।
- स्वास्थ्य संबंधी बीमारियाँ: जयारोग्य अस्पताल (JAH) के डॉक्टरों के अनुसार, अचानक बढ़ी ठंड के कारण हृदय रोग, अस्थमा और ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों ने बुजुर्गों और बच्चों को सुबह की सैर से बचने और गर्म तासीर वाले भोजन का सेवन करने की सलाह दी है।
- पशु-पक्षियों की मुश्किलें: ठंड का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि बेजुबान जानवरों पर भी पड़ रहा है। शहर की गौशालाओं में गायों को ठंड से बचाने के लिए अलाव और तिरपाल की व्यवस्था की जा रही है।
प्रशासन की तैयारियां और रैन बसेरे
कड़ाके की ठंड को देखते हुए जिला प्रशासन और नगर निगम ग्वालियर ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि शहर के किसी भी चौराहे पर कोई भी व्यक्ति खुले में न सोए।
- अलाव की व्यवस्था: नगर निगम ने शहर के प्रमुख 50 से अधिक चौराहों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के बाहर अलाव जलाने के निर्देश दिए हैं।
- रैन बसेरों का निरीक्षण: शहर के विभिन्न रैन बसेरों (Shelter Homes) की क्षमता बढ़ाई गई है और वहाँ पर्याप्त कंबल व हीटिंग की सुविधा सुनिश्चित की जा रही है। अधिकारियों की एक टीम रात में पेट्रोलिंग कर रही है ताकि बेसहारा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा सके।
किसानों के लिए चिंता का विषय
यह ठंड खेती-किसानी के लिए ‘दोधारी तलवार’ की तरह है। जहाँ एक ओर हल्की ठंड गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद मानी जाती है, वहीं कड़ाके की ठंड और ‘पाला’ (Frost) फसलों को बर्बाद भी कर सकता है।
- पाले का खतरा: कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि तापमान 4°C के नीचे जाता है, तो सरसों और सब्जी की फसलों में पाला लगने की संभावना बढ़ जाएगी। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों की मेढ़ों पर धुआं करें और हल्की सिंचाई करें ताकि फसल का तापमान बना रहे।
निष्कर्ष
ग्वालियर का मौसम फिलहाल राहत देने के मूड में नहीं दिख रहा है। हिमालयी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी का सीधा असर यहाँ के तापमान पर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में मकर संक्रांति के बाद भी ठंड का यह तेवर बरकरार रहने की उम्मीद है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे ठंड से बचने के लिए पर्याप्त उपाय करें और बहुत जरूरी होने पर ही रात के समय बाहर निकलें।







