मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक नगरी ग्वालियर का गजराराजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) इन दिनों पढ़ाई के लिए नहीं, बल्कि छात्रों के आक्रोश के कारण चर्चा में है। लगभग 20,000 पैरामेडिकल छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर कॉलेज परिसर में एक विशाल मोर्चा खोल दिया है। यह आंदोलन केवल कुछ घंटों का विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि पिछले तीन वर्षों से तंत्र की लापरवाही झेल रहे युवाओं के सब्र का बांध टूटना है।
आंदोलन की मुख्य वजह: अधर में लटका भविष्य
इस बड़े आंदोलन की सबसे प्रमुख जड़ सत्र 2021-22 के पैरामेडिकल छात्रों के परिणामों में अत्यधिक देरी है। छात्र पिछले तीन वर्षों से अपनी परीक्षाओं और परिणामों का इंतजार कर रहे हैं। नियमानुसार जो कोर्स अब तक पूरे हो जाने चाहिए थे, उनकी अभी तक परीक्षाएं भी ठीक से संपन्न नहीं हो पाई हैं।
- परिणामों का इंतजार: कई छात्र ऐसे हैं जिन्होंने परीक्षाएं दे दी हैं, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी यूनिवर्सिटी ने रिजल्ट घोषित नहीं किए हैं।
- शून्य घोषित सत्र: छात्रों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण उनके जीवन के कीमती साल बर्बाद हो रहे हैं। बिना रिजल्ट या मार्कशीट के वे न तो अगली कक्षा की पढ़ाई कर पा रहे हैं और न ही कहीं नौकरी के लिए आवेदन कर पा रहे हैं।
प्रदर्शन का स्वरूप और व्यापकता
ग्वालियर का GRMC परिसर विरोध का मुख्य केंद्र बना हुआ है। आंदोलनकारी छात्रों ने न केवल कॉलेज परिसर में नारेबाजी की, बल्कि प्रशासनिक भवन का घेराव भी किया।
- एकजुटता: इस आंदोलन में केवल ग्वालियर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों से जुड़े छात्र भी शामिल हुए। प्रदर्शन में शामिल छात्रों की संख्या प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई।
- मांगें: छात्रों की मुख्य मांग है कि पैरामेडिकल काउंसिल और यूनिवर्सिटी तत्काल प्रभाव से रुके हुए रिजल्ट घोषित करे और आगामी परीक्षाओं का एक स्पष्ट कैलेंडर जारी करे।
- प्रशासनिक विफलता: छात्रों का कहना है कि उन्होंने कई बार शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन दिए, लेकिन जब अधिकारियों ने केवल आश्वासन देकर उन्हें टाल दिया, तो उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।
पैरामेडिकल कोर्सेज की बदहाली
मध्य प्रदेश में पैरामेडिकल कोर्सेज (जैसे नर्सिंग, पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी आदि) पिछले कुछ समय से विवादों में रहे हैं। फर्जी कॉलेज कांड और संबद्धता (Affiliation) के मुद्दों के कारण हजारों छात्रों की परीक्षाएं समय पर नहीं हो सकीं। GRMC के छात्रों का गुस्सा इसी संचित अव्यवस्था का परिणाम है।
कॉलेज और यूनिवर्सिटी प्रशासन का पक्ष
भारी विरोध के बीच कॉलेज प्रबंधन ने स्थिति को संभालने की कोशिश की है। प्रबंधन का कहना है कि परिणामों में देरी का मुख्य कारण तकनीकी दिक्कतें और विश्वविद्यालय स्तर पर चल रही जांच प्रक्रियाएं हैं। हालांकि, छात्र इस तर्क को मानने को तैयार नहीं हैं क्योंकि देरी का समय सीमा से बाहर हो चुका है।
भविष्य पर प्रभाव
यदि इस आंदोलन का जल्द कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं:
- शिक्षा सत्र का पिछड़ना: पहले से ही देरी से चल रहे सत्र और भी अधिक पिछड़ जाएंगे।
- मानसिक तनाव: छात्र और उनके अभिभावक भारी मानसिक और आर्थिक तनाव में हैं, क्योंकि डिग्री पूरी न होने के बावजूद उन्हें फीस और रहने का खर्च वहन करना पड़ रहा है।
- स्वास्थ्य सेवाओं पर असर: ये छात्र भविष्य के स्वास्थ्य कर्मी हैं। उनकी पढ़ाई में देरी का सीधा अर्थ है सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रशिक्षित स्टाफ की कमी होना।
निष्कर्ष
GRMC ग्वालियर का यह छात्र आंदोलन शासन और प्रशासन के लिए एक चेतावनी है। शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी ने छात्रों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। अब यह केवल एक कॉलेज का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की पैरामेडिकल शिक्षा नीति पर विचार करने का विषय बन गया है।







