ग्वालियर का ऐतिहासिक श्रीमंत माधवराव सिंधिया व्यापार मेला इन दिनों अपनी पूरी भव्यता के साथ जारी है। व्यापार, संस्कृति और मनोरंजन के इस महाकुंभ में अब खेल और शारीरिक शक्ति के प्रतीक ‘दंगल’ (कुश्ती प्रतियोगिता) का रोमांच शुरू होने जा रहा है।
ग्वालियर मेले की परंपरा रही है कि यहाँ केवल व्यापार नहीं होता, बल्कि माटी के लाल अपनी कुश्ती की कला का प्रदर्शन भी करते हैं। आज, 17 जनवरी 2026 को इस दंगल की तैयारियों और वातावरण ने पूरे मेला क्षेत्र को उत्साह से भर दिया है।
दंगल का शेड्यूल और भव्यता
आधिकारिक घोषणा के अनुसार, मेले में कुश्ती प्रतियोगिताओं का मुख्य चरण 19 जनवरी 2026 से शुरू होगा, लेकिन आज 17 जनवरी से ही प्रदेश और देश भर के पहलवानों का ग्वालियर आगमन शुरू हो गया है। इस दंगल को तीन प्रमुख स्तरों पर आयोजित किया जा रहा है:
- जिला स्तरीय दंगल (19-20 जनवरी): इसमें ग्वालियर जिले के स्थानीय अखाड़ों के उभरते पहलवान अपनी ताकत दिखाएंगे।
- संभाग स्तरीय दंगल (21-22 जनवरी): ग्वालियर-चंबल संभाग के दिग्गज पहलवानों के बीच कड़ा मुकाबला होगा।
- राज्य स्तरीय महा-दंगल (23-25 जनवरी): यह इस आयोजन का सबसे मुख्य आकर्षण होगा, जिसमें मध्य प्रदेश के कोने-कोने से आए नामी पहलवान ‘केसरी’ खिताब के लिए भिड़ेंगे।
महिला पहलवानों का ‘शक्ति प्रदर्शन’
इस वर्ष के दंगल की सबसे खास बात महिला कुश्ती का आयोजन है। 23 से 25 जनवरी तक होने वाले राज्य स्तरीय महिला दंगल में मध्य प्रदेश की बेटियां भी अखाड़े में दांव-पेच दिखाएंगी। 35-40 किलो से लेकर 70 किलो से अधिक वजन वर्ग में महिला पहलवानों की भिड़ंत देखने लायक होगी। यह कदम खेलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण है।
इनामों की बौछार और सम्मान
माधवराव सिंधिया मेला प्राधिकरण और खेल विभाग ने विजेताओं के लिए आकर्षक पुरस्कारों की घोषणा की है:
- नकद पुरस्कार और ट्रॉफी: प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले पहलवानों को नकद राशि के साथ शानदार मेडल और ट्रॉफी दी जाएगी।
- सम्मान: प्रतिष्ठित पहलवानों को ‘मेला केसरी’ और ‘मेला कुमार’ जैसे खिताबों से नवाजा जाएगा।
अखाड़े की तैयारी और तकनीकी पक्ष
मेला परिसर में विशेष रूप से मिट्टी का अखाड़ा और आधुनिक मैट दोनों की व्यवस्था की जा रही है।
- वजन माप (Weigh-in): निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी पहलवानों का वजन प्रतियोगिता शुरू होने वाले दिन (जैसे 19 जनवरी को जिला स्तर के लिए) लिया जाएगा।
- विशेषज्ञ रेफरी: निष्पक्ष निर्णय के लिए राष्ट्रीय स्तर के रेफरी और जजों की टीम तैनात की गई है।
ग्वालियर-चंबल की ‘पहलवानी’ विरासत
ग्वालियर और चंबल का क्षेत्र हमेशा से ही पहलवानों की खान रहा है। यहाँ के अखाड़ों ने देश को कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिए हैं। मेले में होने वाला यह दंगल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक बड़ा मंच प्रदान करता है। आज मेले में आने वाले पर्यटक भी अखाड़े की तैयारियों को देखकर रोमांचित हैं।
निष्कर्ष
माधवराव सिंधिया व्यापार मेला दंगल 2026 केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह हमारी जड़ों से जुड़ने का एक जरिया है। 19 जनवरी से जब ढोल की थाप पर पहलवानों की कुश्ती शुरू होगी, तब ग्वालियर का मेला मैदान गूंज उठेगा। यदि आप खेल प्रेमी हैं और पारंपरिक भारतीय कुश्ती के दांव-पेच देखना चाहते हैं, तो अगले कुछ दिन ग्वालियर का यह दंगल आपके लिए सबसे अच्छा गंतव्य है।









