ग्वालियर में NSG कमांडो की हाई-इंटेंसिटी मॉक ड्रिल: अभेद्य सुरक्षा का ‘ऑपरेशन गांडीव’
ग्वालियर, जो अपने सामरिक (Strategic) और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है, आगामी 4 से 7 फरवरी 2026 तक एक बड़े सैन्य अभ्यास का केंद्र बनने जा रहा है। देश की सबसे प्रतिष्ठित आतंकवाद-रोधी इकाई, नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के करीब 140 ब्लैक कैट कमांडो शहर के विभिन्न संवेदनशील हिस्सों में ‘हाई-इंटेंसिटी’ मॉक ड्रिल करेंगे।
यह अभ्यास केवल एक सैन्य प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह ग्वालियर की सुरक्षा व्यवस्था को परखने और उसे किसी भी आकस्मिक आतंकी हमले के लिए अभेद्य बनाने की एक बड़ी कवायद है।
आधी रात को होगा ‘युद्ध’ का अभ्यास
मॉक ड्रिल की सबसे खास बात यह है कि इसे आधी रात के समय अंजाम दिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों का निर्माण करना है, जहां दृश्यता कम होती है और जोखिम अधिक।
- प्रमुख स्थान: अभ्यास के लिए महाराजपुरा एयरबेस, मुरार सेना छावनी (Army Cantt) और BSF अकादमी टेकनपुर जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों को चुना गया है।
- रणनीति: कमांडो हेलीकॉप्टर से इमारतों पर उतरने (Slithering), बंधक बचाव (Hostage Rescue) और संदिग्धों को ढेर करने जैसी जटिल तकनीकों का अभ्यास करेंगे।
ग्वालियर का सामरिक महत्व
NSG ने इस अभ्यास के लिए ग्वालियर को इसलिए चुना है क्योंकि यह शहर भारतीय रक्षा प्रणाली का एक मजबूत स्तंभ है।
- यहाँ वायुसेना का महत्वपूर्ण बेस है (जहां से मिराज और सुखोई विमानों का संचालन होता है)।
- यहाँ DRDO और DRDE जैसी महत्वपूर्ण लैब मौजूद हैं।
- यहाँ BSF और CRPF के बड़े प्रशिक्षण केंद्र हैं।इन संस्थानों की सुरक्षा को किसी भी खतरे से बचाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सर्वोपरि है।
अंतर-एजेंसी समन्वय (Coordination)
मॉक ड्रिल केवल NSG तक सीमित नहीं है। इसमें स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन, खुफिया विभाग (IB), फायर ब्रिगेड और मेडिकल टीमें भी सक्रिय रूप से शामिल होंगी।
- इसका उद्देश्य यह देखना है कि यदि अचानक कोई हमला होता है, तो अलग-अलग विभाग कितनी तेजी से एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठाते हैं।
- अधिकारियों के अनुसार, “समय और सूचनाओं का आदान-प्रदान (Communication gap)” किसी भी ऑपरेशन की सफलता या विफलता का मुख्य कारण होता है, जिसे इस ड्रिल के जरिए सुधारा जाएगा।
‘काउंटर-टेरर टास्कफोर्स’ की भूमिका
इस अभ्यास का नेतृत्व NSG की सीटीटीएफ (Counter-Terrorist Task Force) कर रही है। इसमें न केवल असॉल्ट टीमें शामिल हैं, बल्कि विस्फोटक निरोधक दस्ता (EOD) और विशेष रूप से प्रशिक्षित खोजी कुत्ते (K9 Unit) भी शामिल हैं। वे ग्वालियर के भीड़भाड़ वाले इलाकों और संवेदनशील सरकारी इमारतों में “छिपे हुए दुश्मनों” को खोजने का अभ्यास करेंगे।
नागरिकों के लिए निर्देश
प्रशासन ने शहरवासियों से अपील की है कि वे इस ड्रिल के दौरान भारी शोर, धमाकों या कमांडो की हलचल देखकर घबराएं नहीं। सुरक्षा कारणों से कुछ मार्गों पर आवाजाही रोकी जा सकती है या ड्रोन कैमरों का उपयोग किया जा सकता है।
निष्कर्ष
ग्वालियर में हो रही यह मॉक ड्रिल इस बात का प्रमाण है कि भारत अपनी आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। NSG के कमांडो जब अपनी ट्रेडमार्क काली वर्दी में शहर की सड़कों और छतों पर उतरेंगे, तो यह न केवल आतंकवादियों के लिए चेतावनी होगी, बल्कि आम नागरिकों के मन में अपनी सुरक्षा के प्रति विश्वास भी पैदा करेगी।









