परियोजना की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
ग्वालियर शहर में यातायात के बढ़ते दबाव को कम करने और शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक की दूरी को मिनटों में समेटने के लिए ‘स्वर्ण रेखा नदी’ के ऊपर एलिवेटेड रोड का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना के पहले चरण का कार्य लगभग पूर्णता की ओर है, लेकिन दूसरे चरण (तारागंज से जीवाजीगंज और उससे आगे) के निर्माण में भूमि की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। जल संसाधन विभाग और नगर निगम के संयुक्त सर्वे में यह पाया गया है कि स्वर्ण रेखा नदी के दोनों किनारों पर और नदी के डूब क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पक्के निर्माण कर लिए गए हैं, जो सड़क के पिलर खड़े करने में बाधक बन रहे हैं।
सर्वे में हुआ अवैध संपत्तियों का खुलासा
जिला प्रशासन और भू-अर्जन विभाग की टीम ने पिछले एक महीने तक सघन सर्वे किया। इस सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, कुल 268 ऐसी संपत्तियां पाई गई हैं जो तकनीकी रूप से अवैध हैं। इनमें से अधिकांश निर्माण नदी की सीमा के भीतर या सरकारी जमीन पर बिना अनुमति के किए गए हैं। चिह्नित संपत्तियों में रिहायशी मकान, दुकानें, गोदाम और कुछ धार्मिक स्थलों के बाहरी हिस्से भी शामिल हैं। प्रशासन ने इन सभी निर्माणों पर लाल निशान (Red Marking) लगा दिए हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया है।
मुआवजे और विस्थापन की नीति
कलेक्टर ग्वालियर के निर्देशानुसार, संपत्तियों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी उन लोगों की है जिनके पास भूमि के वैध दस्तावेज हैं लेकिन विकास कार्य के लिए उनकी जमीन अधिग्रहित करना अनिवार्य है। ऐसे 84 परिवारों के लिए लगभग 63 करोड़ रुपये के मुआवजे का प्रावधान किया गया है। दूसरी श्रेणी उन 184 संपत्तियों की है जो पूरी तरह से अतिक्रमण की श्रेणी में आती हैं। इन्हें प्रशासन ने ‘अवैध’ घोषित किया है और इन्हें हटाने के लिए कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा। हालांकि, मानवीय आधार पर अति-गरीब परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास (PM Awas) देने पर विचार किया जा रहा है।
विरोध और प्रशासनिक तैयारी
जैसे ही प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की चेतावनी दी, लक्ष्मीगंज और तारागंज इलाके के लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रभावितों का तर्क है कि वे यहाँ दशकों से रह रहे हैं और उनके पास बिजली बिल व नगर निगम के टैक्स की रसीदें हैं। वहीं, नगर निगम आयुक्त का कहना है कि टैक्स देना जमीन के मालिकाना हक का प्रमाण नहीं है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल की मांग की गई है। नगर निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि लोग स्वयं अपने अतिक्रमण नहीं हटाते हैं, तो निगम का बुलडोजर उन्हें जमींदोज कर देगा और इसका खर्च भी संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा।
एलिवेटेड रोड के फायदे
प्रशासन इस सख्त कार्रवाई को शहर के भविष्य के लिए अनिवार्य बता रहा है। एक बार यह रोड पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद, ग्वालियर के हजीरा से लेकर कंपू और लश्कर तक का सफर मात्र 15-20 मिनट में तय हो सकेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि शहर के मुख्य बाजारों में लगने वाले भीषण जाम से भी मुक्ति मिलेगी। स्वर्ण रेखा नदी के सौंदर्यीकरण और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी इन अतिक्रमणों का हटना जरूरी माना जा रहा है।
अगले कदम
आने वाले एक सप्ताह के भीतर अंतिम नोटिस जारी किए जाएंगे। इसके बाद, जल संसाधन विभाग, नगर निगम और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम एक मेगा-ड्राइव चलाकर इन 268 संपत्तियों को हटाने की कार्रवाई शुरू करेगी। स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारी लगातार निर्माण एजेंसी के संपर्क में हैं ताकि अतिक्रमण हटते ही पिलर खड़े करने का काम शुरू किया जा सके और परियोजना अपनी निर्धारित समय सीमा (Deadline) के भीतर पूरी हो सके।







