ग्वालियर शहर के यातायात को नई गति देने वाला महत्वाकांक्षी एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट (स्वर्ण रेखा नदी के ऊपर) अब एक बड़ी बाधा का सामना कर रहा है। शहर के सबसे व्यस्त सब्जी मंडी क्षेत्र में फुटपाथी दुकानदारों और ठेले वालों के अवैध अतिक्रमण के कारण निर्माण कार्य की रफ्तार थम गई है। जिस स्थान पर भारी मशीनरी और पिलर खड़े होने हैं, वहां सुबह से रात तक सैकड़ों अवैध दुकानों का कब्जा रहता है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नगर निगम और जिला प्रशासन अब इस गतिरोध को खत्म करने के लिए आर-पार के मूड में है। आने वाले कुछ ही दिनों में यहाँ ‘बड़ा बेदखली अभियान’ चलाया जा सकता है, ताकि प्रोजेक्ट को समय सीमा में पूरा किया जा सके।
क्यों फंसा है एलिवेटेड रोड का पेंच?
स्वर्ण रेखा पर बन रही एलिवेटेड रोड ग्वालियर के ट्रैफिक को सुगम बनाने के लिए गेम-चेंजर मानी जा रही है। लेकिन सब्जी मंडी वाला हिस्सा तकनीकी रूप से सबसे चुनौतीपूर्ण है:
- मशीनों के लिए जगह की कमी: पिलर की खुदाई और क्रेन संचालन के लिए कम से कम 30-40 फीट चौड़े गलियारे की आवश्यकता है। वर्तमान में दुकानदारों ने नदी के किनारों और मुख्य सड़क तक अपनी दुकानें फैला ली हैं।
- ट्रैफिक जाम की दोहरी मार: मंडी के कारण पहले ही यहाँ जाम रहता है, ऊपर से निर्माण सामग्री आने पर स्थिति अनियंत्रित हो जाती है। जब तक दुकानों को पीछे नहीं हटाया जाता, तब तक निर्माण कार्य शुरू करना सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक है।
प्रशासन की रणनीति: ‘समझाइश’ के बाद अब ‘सख्ती’
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि दुकानदारों को कई बार मौखिक और लिखित नोटिस दिए जा चुके हैं कि वे स्वेच्छा से जगह खाली कर दें, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
- अंतिम चेतावनी: नगर निगम की रिमूवल टीम ने मंडी क्षेत्र में मुनादी (घोषणा) शुरू कर दी है। दुकानदारों को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया जा रहा है।
- भारी पुलिस बल की मांग: मंडी क्षेत्र संवेदनशील होने के कारण, नगर निगम ने पुलिस प्रशासन से 200 से अधिक जवानों और महिला पुलिस बल की मांग की है ताकि कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था न बिगड़े।
- जब्ती की कार्रवाई: प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस बार केवल दुकानें हटाई नहीं जाएंगी, बल्कि सड़क पर रखा सामान और अवैध ठेले स्थायी रूप से जब्त कर लिए जाएंगे।
वैकल्पिक व्यवस्था: कहां जाएंगे दुकानदार?
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन दुकानदारों का पुनर्वास करना है। शहर के विकास के साथ-साथ गरीबों की रोजी-रोटी का सवाल भी जुड़ा है।
- निगम की योजना है कि इन दुकानदारों को पास की किसी खाली सरकारी जमीन या हाकर्स जोन में शिफ्ट किया जाए।
- हालांकि, दुकानदार इस बात पर अड़े हैं कि वे मुख्य मार्ग छोड़कर अंदर नहीं जाएंगे क्योंकि वहां व्यापार कम होता है। इसी खींचतान की वजह से एलिवेटेड रोड का काम अधर में लटका है।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर बढ़ता दबाव
एलिवेटेड रोड के निर्माण में हो रही देरी से प्रोजेक्ट की लागत बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। उच्च स्तर से निर्देश हैं कि 2026 के अंत तक इस प्रोजेक्ट का एक बड़ा हिस्सा जनता के लिए खोल दिया जाना चाहिए। सब्जी मंडी का ‘डेडलॉक’ अगर जल्द नहीं टूटा, तो ग्वालियर के नागरिकों को धूल और जाम से अभी और महीनों तक जूझना पड़ेगा।
“विकास की राह में अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एलिवेटेड रोड पूरे ग्वालियर के हित में है। हम दुकानदारों से सहयोग की अपील करते हैं, अन्यथा कानूनी बल प्रयोग अनिवार्य होगा।” – नगर निगम अधिकारी
निष्कर्ष
सब्जी मंडी में एलिवेटेड रोड का पेंच अब शहर की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। एक तरफ विकास की गति है और दूसरी तरफ दशकों से जमा अतिक्रमण। नगर निगम की आगामी कार्रवाई यह तय करेगी कि ग्वालियर अपने ‘स्मार्ट’ बनने के सपने की ओर कितनी तेजी से बढ़ता है। नागरिकों को उम्मीद है कि प्रशासन इस बार बिना किसी राजनीतिक दबाव के सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराएगा।







