ग्वालियर में जालसाजी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने रिश्तों की पवित्रता और वैवाहिक विज्ञापनों पर भरोसे को झकझोर कर रख दिया है। एक शातिर ठग ने खुद को ‘इनकम टैक्स ऑफिसर’ बताकर न केवल एक युवती से शादी की, बल्कि उसके पिता से व्यापार और अन्य बहानों से 40 लाख रुपये भी ठग लिए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी पिछले 21 महीनों से अपनी पत्नी और ससुराल वालों के सामने अधिकारी होने का नाटक करता रहा, लेकिन अंततः उसकी पोल खुल गई।
धोखाधड़ी की शुरुआत: मैट्रिमोनियल साइट से बुना जाल
इस मामले की शुरुआत लगभग दो साल पहले हुई थी। ग्वालियर के एक प्रतिष्ठित परिवार ने अपनी बेटी के लिए मैट्रिमोनियल साइट (शादी की वेबसाइट) पर योग्य वर की तलाश शुरू की थी। वहां उनकी मुलाकात अभिषेक नाम के युवक से हुई।
- झूठी पहचान: अभिषेक ने खुद को दिल्ली में तैनात एक ‘क्लास-1’ इनकम टैक्स ऑफिसर बताया। उसने फर्जी आईडेंटिटी कार्ड, ऑफिस की तस्वीरें और यहां तक कि कुछ जाली दस्तावेज भी दिखाए ताकि किसी को शक न हो।
- दिखावा: वह अक्सर फॉर्मल सूट पहनकर निकलता और खुद को बेहद व्यस्त दिखाने का नाटक करता था। उसकी बातों और रसूख से प्रभावित होकर परिवार ने धूमधाम से अपनी बेटी की शादी उसके साथ कर दी।
शादी के बाद 40 लाख की वसूली
शादी के बाद असली खेल शुरू हुआ। आरोपी ने धीरे-धीरे अपने ससुर और पत्नी को विश्वास में लिया और विभिन्न बहानों से पैसे ऐंठना शुरू किया:
- बिजनेस का झांसा: उसने दावा किया कि वह अपनी सरकारी नौकरी के साथ-साथ कुछ बड़े निवेश कर रहा है, जिसमें भारी मुनाफे की उम्मीद है।
- पारिवारिक मजबूरी: उसने समय-समय पर अपने परिवार की बीमारी और संपत्तियों के विवाद को सुलझाने के नाम पर मोटी रकम उधार ली।
- रसूख का इस्तेमाल: उसने ससुर को भरोसा दिलाया कि उसकी ऊँची पहुँच के कारण वह उनके कुछ सरकारी अटके हुए काम भी करवा देगा।
पीड़ित पिता ने अपनी जमापूंजी और कुछ कर्ज लेकर अब तक कुल 40 लाख रुपये उसे सौंप दिए।
कैसे खुला राज? 21 महीने का सस्पेंस
अभिषेक की पत्नी को धीरे-धीरे उसकी जीवनशैली पर शक होने लगा। वह अक्सर ‘ऑफिस’ जाने के नाम पर घंटों गायब रहता था, लेकिन कभी भी अपने दफ्तर के सहकर्मियों से उसे नहीं मिलवाया।
- जांच-पड़ताल: जब शक गहराया, तो पत्नी और उसके परिवार ने गुपचुप तरीके से दिल्ली स्थित उस इनकम टैक्स ऑफिस में जाकर पूछताछ की, जहां अभिषेक की तैनाती का दावा किया गया था।
- हैरान करने वाला सच: विभाग के रिकॉर्ड में अभिषेक नाम का कोई अधिकारी मौजूद ही नहीं था। जब उसके द्वारा दिए गए आईडेंटिटी कार्ड की जांच की गई, तो वह एक साधारण कंप्यूटर सॉफ्टवेयर से बनाया गया फर्जी कार्ड निकला।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
सच्चाई सामने आते ही पीड़ित परिवार ने ग्वालियर के संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया।
- बरामदगी: पुलिस को आरोपी के पास से कई फर्जी मोहरें, फर्जी नियुक्ति पत्र और सरकारी विभागों के लेटरहेड मिले हैं।
- जांच का दायरा: पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या अभिषेक ने इस तरह का धोखा किसी और परिवार के साथ भी किया है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस ठगी में उसके परिवार के अन्य सदस्य शामिल थे या नहीं।
समाज के लिए एक सबक
यह घटना ऑनलाइन मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने वाले परिवारों के लिए एक बड़ी चेतावनी है।
- सत्यापन की कमी: अक्सर लोग प्रोफाइल पर लिखी बातों और फोटो पर भरोसा कर लेते हैं, जबकि दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) नहीं करते।
- आर्थिक सावधानी: शादी जैसे रिश्तों में शुरुआत में ही बड़े आर्थिक लेन-देन से बचना चाहिए, खासकर जब कोई पक्ष निवेश या व्यापार के लिए दबाव बना रहा हो।
निष्कर्ष
ग्वालियर की इस घटना ने साबित कर दिया है कि ठग अब केवल बैंकों से ही नहीं, बल्कि रिश्तों की आड़ में भी लोगों को शिकार बना रहे हैं। 21 महीने तक एक फर्जी पहचान के साथ रहना आरोपी की शातिर मानसिकता को दर्शाता है। फिलहाल आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।







