मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से चीतों के बाहर निकलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा घटनाक्रम में, कूनो की सीमाएं लांघकर दो चीते अब ग्वालियर-शिवपुरी हाईवे (NH-46) के बेहद करीब देखे गए हैं।
चीतों की इस चहलकदमी ने न केवल स्थानीय ग्रामीणों, बल्कि हाईवे पर सफर करने वाले यात्रियों और वन विभाग की भी धड़कनें बढ़ा दी हैं। सड़क किनारे चीतों की मौजूदगी की खबर जंगल की आग की तरह फैल गई है, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
कूनो से दूर, हाईवे के पास: कैसे पहुँचे चीते?
विशेषज्ञों के अनुसार, चीते स्वाभाविक रूप से ‘होम रेंज’ (अपना इलाका) बनाने के लिए लंबी दूरी तय करते हैं। कूनो से निकलकर ये शिकारी जानवर अक्सर खुले मैदानों और घने जंगलों के बीच के गलियारों (Corridors) का उपयोग करते हैं।
बताया जा रहा है कि एक नर और एक मादा चीता पिछले 48 घंटों से शिवपुरी के कोलारस क्षेत्र से होते हुए ग्वालियर की ओर जाने वाले नेशनल हाईवे के पास के जंगलों में विचरण कर रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और वाहन चालकों ने दावा किया है कि उन्होंने रात के अंधेरे में सड़क किनारे झाड़ियों के पास चीतों की चमकती आंखें और उनकी विशिष्ट चाल देखी है।
वन विभाग की कार्रवाई: गश्त और मॉनिटरिंग तेज
खबर मिलते ही वन विभाग की ‘चीता मॉनिटरिंग टीम’ अलर्ट मोड पर आ गई है। ग्वालियर और शिवपुरी वन मंडल के अधिकारियों ने संयुक्त अभियान शुरू किया है:
- सैटेलाइट कॉलर ट्रैकिंग: दोनों चीतों के गले में लगे रेडियो कॉलर के जरिए उनकी पल-पल की लोकेशन ट्रैक की जा रही है। कंट्रोल रूम से सीधे उनकी मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है।
- ड्रोन सर्विलांस: घने जंगल और हाईवे के आसपास के इलाकों में ड्रोन कैमरों का उपयोग किया जा रहा है ताकि उनकी सटीक स्थिति का पता लगाया जा सके।
- हाईवे पेट्रोलिंग: वन विभाग की विशेष टीमें जीपों के जरिए हाईवे पर गश्त कर रही हैं ताकि चीते अचानक सड़क पर न आ जाएं।
यात्रियों और ग्रामीणों के लिए ‘रेड अलर्ट’
वन विभाग ने आधिकारिक तौर पर एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है:
- रफ्तार पर नियंत्रण: हाईवे पर वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी गति कम रखें, विशेषकर रात के समय, क्योंकि चीते अचानक सड़क पार कर सकते हैं।
- वाहन से बाहर न निकलें: किसी भी स्थिति में फोटो या वीडियो बनाने के लिए हाईवे किनारे गाड़ी न रोकें और न ही वाहन से नीचे उतरें।
- ग्रामीणों को निर्देश: आसपास के गांवों के लोगों को अकेले खेतों में न जाने और पालतू जानवरों को सुरक्षित बाड़ों में रखने को कहा गया है।
क्या चीतों से इंसान को खतरा है?
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि चीते स्वभाव से शर्मीले होते हैं और वे आमतौर पर इंसानों पर हमला नहीं करते। हालांकि, यदि वे खुद को असुरक्षित महसूस करें या उनके शिकार में कोई बाधा आए, तो वे आक्रामक हो सकते हैं। सबसे बड़ा खतरा सड़क दुर्घटना का है। यदि कोई चीता हाईवे पर आता है और तेज रफ्तार वाहन से टकराता है, तो यह ‘प्रोजेक्ट चीता’ के लिए एक बड़ा झटका होगा।
प्रोजेक्ट चीता और चुनौतियों का सामना
यह घटना एक बार फिर इस बहस को जन्म दे रही है कि क्या कूनो नेशनल पार्क का क्षेत्रफल इन चीतों के लिए पर्याप्त है। चीतों का बार-बार पार्क की सीमा से बाहर निकलकर रिहायशी इलाकों और हाईवे की ओर आना यह दर्शाता है कि उन्हें और अधिक खुले और सुरक्षित गलियारों की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
ग्वालियर हाईवे पर चीतों की मौजूदगी एक रोमांचक खबर तो है, लेकिन यह एक बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आई है। वन विभाग की प्राथमिकता इन चीतों को सुरक्षित रूप से वापस कूनो के कोर एरिया या बफर जोन में धकेलने की है। तब तक, यात्रियों को ‘सतर्कता’ ही अपनी सुरक्षा का सबसे बड़ा हथियार मानना होगा। प्रशासन पूरी कोशिश कर रहा है कि इंसान और जानवर के बीच किसी भी तरह के संघर्ष (Human-Animal Conflict) को टाला जा सके।









